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Thursday, 30 April 2020

शंघाई सहयोग संगठन

शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 1996 में शंघाई फाइव के नाम से की गई थी. चूंकि इसकी स्थापना चीन के
शहर शंघाई में की गई थी इसलिए आरंभ में इसका उक्त नाम रखा गया था. तब इस संगठन में पाँच सदस्य थे - रूस, चीन, कजाखिस्तान, तुर्कमेनिस्तान तथा तजाकिस्तान. 2001 के शिखर सम्मेलन में इसका नाम बदलकर शंघाई सहयोग संगठन कर दिया गया. सेण्टपीटर्सबर्ग, रूस में सम्पन्न 2002 के शिखर सम्मेलन में ही शंघाई सहयोग संगठन का चार्टर स्वीकृत किया गया था. सेण्ट्रल एशिया के पाँच देशों में केवल किरगिस्तान ही शंघाई सहयोग संगठन का सदस्य नहीं है. 2017 में भारत तथा पाकिस्तान को शंघाई सहयोग संगठन की स्थायी सदस्यता प्रदान कर दी गई है. इसी के साथ शंघाई सहयोग संगठन की स्थायी सदस्यता बढ़कर आठ हो गई है. भारत की सदस्यता का समर्थन जहाँ रूस ने किया वहीं भारत को संतुलित करने के लिए पाकिस्तान की सदस्यता का समर्थन चीन ने किया है।

शंघाई सहयोग संगठन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं

1. सदस्य देशों के मध्य आपसी विश्वास तथा अच्छे पड़ोस के सम्बन्धों को मजबूत बनाना ।

2. सदस्य देशों के मध्य राजनीति, व्यापार तथा अर्थव्यवस्था, विज्ञान तथा तकनीकी, संस्कृति, ऊर्जा, शिक्षा, यातायात, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना। 

3.सेण्ट्रल एशिया क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा सुरक्षा को बनाये रखने तथा सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयास करना।

4. एक नई लोकतांत्रिक, न्यायसंगत व विवेकपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था की स्थापना की ओर अग्रसर होना ।
        आरम्भ में शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना केवल क्षेत्रीय सुरक्षा व स्थायित्व के उद्देश्य को ध्यान में रखकर की गई थी, लेकिन बाद में इसकी गतिविधियों का दायरा बढ़ाकर इसमें आर्थिक सहयोग को भी शामिल कर लिया गया है।

संगठनात्मक ढांचा - शंघाई सहयोग संगठन की मुख्य रूप से चार संस्थाएँ इसके कार्यों का निष्पादन करती हैं,

शीर्ष स्तर पर सदस्य देशों के राज्याध्यक्षों की परिषद है जो इसकी सबसे उच्च नीति निर्माता संस्था है. प्रतिवर्ष सम्पन्न होने वाले इसके सम्मेलनों को ही शिखर सम्मेलनों की संज्ञा दी जाती है।

दूसरे स्तर पर सदस्य देशों के शासनाध्यक्षों की परिषद है, जिसकी बैठकें वार्षिक आधार पर सम्पन्न होती हैं. यह परिषद् बहुपक्षीय सहयोग के मुद्दों पर चर्चा करती है तथा संगठन का बजट पारित करती है।

तीसरे स्तर पर सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की परिषद है, जिसकी नियमित बैठकें होती हैं. यह परिषद् समकालीन अन्तर्राष्ट्रीय स्थिति की समीक्षा करती है तथा अन्य वैश्विक संगठनों के साथ सहयोग पर विचार-विमर्श करती है।

चौथे स्तर पर राष्ट्रीय समन्वयकर्ताओं की परिषद् है, जिसका मुख्य दायित्व सदस्य देशों के मध्य बहुपक्षीय सहयोग के कार्यक्रमों में समन्वय स्थापित करना है।

शंघाई सहयोग संगठन की दो अन्य संस्थाएँ भी हैं प्रथम संगठन का सचिवालय है, जो चीन की राजधानी बीजिंग में स्थित है तथा संगठन के प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करता है. दूसरी संस्था उजबेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में स्थित क्षेत्रीय आतंकवाद निरोधी ढाँचा (Regional Counter-Terrorism Structure-RCTS) है, जिसका मुख्य कार्य आतंकवाद तथा अन्य संगठित अपराधों की चुनौती का सामना करने के लिए सदस्य देशों की क्षमता का विस्तार करना है. इस संगठन की स्थापना 2004 में की गई थी.


The Shanghai Cooperation Organization was established in 1996 under the name Shanghai Five. Since it was founded in the Chinese city of Shanghai, it was initially named after it. Then there were five members in this organization - Russia, China, Kazakhstan, Turkmenistan and Tajikistan. It was renamed SCO at the 2001 summit. The Charter of the Shanghai Cooperation Organization was approved at the 2002 summit held in SaintPetersburg, Russia. Kyrgyzstan is not the only member of the Shanghai Cooperation Organization among the five countries of Central Asia.In 2017, India and Pakistan have been granted permanent membership of SCO. With this, the permanent membership of SCO has increased to eight. While Russia supported India's membership, China has supported Pakistan's membership to balance India. 

Following are the main objectives of SCO

1. Strengthening mutual trust and good neighborhood relations among member countries.

2. To promote cooperation among member countries in politics, trade and economy, science and technology, culture, energy, education, traffic, tourism, environmental protection and other areas.

3. Making joint efforts to maintain and ensure peace, stability and security in the Central Asia region,

4. To move towards the establishment of a new democratic, just and prudent international political and economic system. 

 Initially, the Shanghai Cooperation Organization was established with the objective of regional security and stability only, but later the scope of its activities has also been extended to include economic cooperation.

Organizational set-up: The SCO primarily has four institutions performing its functions,

At the top level is the Council of Heads of Member States which is its highest policy making body. Its conferences held every year are called summits.

The second level is the Council of the Heads of Government of the member countries, whose meetings are held on an annual basis. This council discusses issues of multilateral cooperation and passes the budget of the organization.



The third level is the Council of Foreign Ministers of the member countries, which have regular meetings. The Council reviews the contemporary international situation and discusses cooperation with other global organizations.

At the fourth level is the Council of National Coordinators, whose main responsibility is to coordinate the programs of multilateral cooperation between the member countries.

The Shanghai Cooperation Organization also has two other institutions. The first is the secretariat of the organization, located in Beijing, the capital of China, and performs the administrative responsibilities of the organization. The second institution is the Regional Counter-Terrorism Structure-RCTS located in Tashkent, the capital of Uzbekistan, whose main task is to expand the capacity of member states to face the challenge of terrorism and other organized crimes. This organization was founded in 2004.




       



Monday, 6 April 2020

करेंट अफेयर्स 2019

🔰चन्द्रयान 2 से सम्बंधित महत्त्वपूर्ण 40 प्रश्न एक जगह 🚀👇
          
 प्रश्न1  चंद्रयान मिशन 2 को कब लांच किया गया?
 उत्तर-  22 जुलाई 2019

 प्रश्न2 Chandrayaan-2 अभियान को भारत के किस शक्तिशाली रॉकेट से लांच किया गया?
 उत्तर –GSLV  मार्क 3

 प्रश्न3 भारत की कौन सी संस्था  ने चंद्रयान मिशन 2 को लॉन्च किया?
 उत्तर-  ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन)

प्रश्न4   चंद्रयान-2   को किस अंतरिक्ष केंद्र से लांच किया गया?
 उत्तर-  सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र

 प्रश्न5  चंद्रयान मिशन 2 को लॉन्च करने में कितना खर्च आया?
 उत्तर- 960  करोड़ रुपए

 प्रश्न6 ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) का मुख्यालय कहां पर स्थित है?
 उत्तर-  बेंगलुरु

 प्रश्न7   चंद्रयान-2  को कहां पर उतरना है?
 उत्तर-  चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर

  प्रश्न8  चंद्रयान-2 अभियान को कहां से लांच किया गया?
 उत्तर-  श्रीहरिकोटा

 प्रश्न9 सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र कहां पर स्थित है?
 उत्तर- Andhra Pradesh

 प्रश्न10 भारत का अंतरिक्ष मंत्रालय किसके पास है?
 उत्तर-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

 प्रश्न11  चंद्रयान मिशन 2 के प्रोजेक्ट डायरेक्टर कौन है?
 उत्तर-  एम वनीता और रितु करीधल

 प्रश्न12  वर्तमान में ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन)  के अध्यक्ष कौन है?
 उत्तर- के सिवन (2019)

 प्रश्न13 चंद्रयान-2 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने में कितने दिन का समय  लगेगा?
 उत्तर- 53 से 54  दिन

 प्रश्न14 चंद्रयान-2  अभियान भारत का चंद्रमा के लिए कौन सा मिशन होगा?
 उत्तर-  दूसरा

 प्रश्न15  चंद्रयान मिशन1  कब लांच किया गया था?
 उत्तर-  22 अक्टूबर 2008

 प्रश्न16 चंद्रयान-2 को कहां से लांच किया गया था?
 उत्तर-  सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र ( श्रीहरिकोटा)

 प्रश्न17 चंद्रयान मिशन 1  को लांच करने में कितना खर्चा आया था?
 उत्तर- 380  करोड़ रुपए

 प्रश्न18  चंद्रयान मिशन 1 के समय इसरो के अध्यक्ष कौन थे?
 उत्तर-  जी माधवन नायर

 प्रश्न19  चंद्रयान-2  को किस रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था?
 उत्तर- PSLV-C11

  प्रश्न20  चंद्रयान-2 चंद्रमा पर कब पहुंचा था?
 उत्तर- _........_****

  प्रश्न21  चंद्रयान-2 की सफल सेंडिंग के साथ भारत चंद्रमा की सत्ता है पर पहुंचने वाला दुनिया का कौन सा देश बन जाएगा?
 उत्तर-  चौथा

प्रश्न22  चंद्रयान 2 के तीन मत्वपूर्ण हिस्से कौन से हैं?
 उत्तर-  ऑर्बिटर, लैंडिंग  एवं रोवर

 प्रश्न23  चंद्रयान मिशन 2 लैनडर का क्या नाम रखा गया है?
उत्तर-  विक्रम

 प्रश्न24  चंद्रयान-2 का हिस्सा ऑर्बिटल क्या कार्य करेगा?
 उत्तर-  चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएगा

 प्रश्25 चंद्रयान-2 का हिस्सा  लैनडर क्या कार्य करेगा?
 उत्तर-  चंद्रमा की सतह पर उतरेगा

 प्रश्न26  चंद्रयान-2 का हिस्सा रोवर क्या कार्य करेगा?
 उत्तर-  चंद्रमा की सतह पर उतरेगा और चलेगा

 प्रश्न27  किस देश का चंद्रयान मिशन बेरेशीट असफल हो गया था?
 उत्तर-  इजराइल

प्रश्न28 चंद्रयान मिशन बेरेशीट को कब लॉन्च किया गया था?
 उत्तर-  22 फरवरी को

 प्रश्न29  पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी कितनी है?
 उत्तर- 384400 km

प्रश्न30  चंद्रमा से परावर्तित रोशनी पृथ्वी तक कितने समय में पहुंचती हैं?
 उत्तर- 1.30  सेकंड

 प्रश्न31  चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की अपेक्षा कितना है?
 उत्तर- 1\6

प्रश्न32  पृथ्वी की सतह से चांद का कितने प्रतिशत भाग दिखाई देता है?
 उत्तर-  59%

 प्रश्न33  चंद्रमा का व्यास कितना होता है?
 उत्तर- 3478 किमी

 प्रश्न34 चंद्रमा के वर्णन की विद्या को क्या कहा जाता है?
 उत्तर- सेलेनोलॉजी (Selenology)

 प्रश्न35  चांद पर कदम रखने वाला प्रथम इंसान नील आर्मस्ट्रांग किस अंतरिक्ष यान से चंद्रमा पर उतरे थे?
 उत्तर-  अपोलो11

 प्रश्न36 नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर कदम कब रखा था?
 उत्तर-   20 जुलाई 1969

 प्रश्न37  किसे जीवाश्म ग्रह के नाम से  भी जाना जाता है?
उत्तर-  चंद्रमा

 प्रश्न38  चंद्रयान-2 का वजन कितना है?
 उत्तर- 3877 किलोग्राम

 प्रश्न39 चांद के दक्षिणी ध्रुव   पर उतरने वाला दुनिया का पहला देश कौन  बना है?
 उत्तर-  भारत

 प्रश्न40 आर्बिटल का क्या काम है?
 उत्तर-  मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच कम्युनिकेशन करना

✅करेंट अफेयर्स एक पंक्ति में: 1 नवम्बर 2019

• भारत और बांग्लादेश के बीच देश का पहला डे-नाईट टेस्ट मैच जिस मैदान पर खेला जायेगा – ईडन गार्डन्स

• वह देश जिसने बड़े स्तर पर हो रहे नागरिक प्रदर्शनों के कारण वहां आयोजित होने वाले COP25 और APEC शिखर सम्मेलन के अयोजन को रद्द कर दिया है – चिली

• वह दिन जब राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है – 31 अक्टूबर

• इन्होने हाल ही में लद्दाख के पहले उप-राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की - आरके माथुर

• नेशनल हेल्थ प्रोफाइल-2019 के अनुसार भारत में लोगों की जीवन प्रत्याशा वर्ष 1970-1975 की तुलना में 49.7 से बढ़कर अब हो गई है - 68.7

• प्रत्येक वर्ष भारत में 31 अक्टूबर को जिस पूर्व प्रधानमंत्री की पुण्यतिथि मनाई जाती है – इंदिरा गाँधी

• अरब सागर से उठे चक्रवात का नाम जिसके लक्षद्वीप से होकर गुजरने की घोषणा की गई है – MAHA

• वह राज्य जिसके लोकनृत्य भओना (Bhaona) के अंग्रेज़ी संस्करण का आयोजन आबू धाबी में किया गया – असम

• इन्होने हाल ही में नॉर्डिक परिषद का पर्यावरण पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया - ग्रेटा थनबर्ग

• वह क्रिकेट खिलाड़ी जिसने मानसिक अस्वस्थता के चलते खेल से अनिश्चितकालीन ब्रेक. लेने की घोषणा की है - ग्लेन मैक्सवेल


✅ करेंट अफेयर्स एक पंक्ति में: 02 नवंबर 2019 

• वह राज्य जिसने बिहार और राजस्थान के बाद गुटखा और पान मसाले पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने का निर्णय लिया है – पश्चिम बंगाल

• 35वां आसियान शिखर सम्मेलन हाल ही में जिस शहर में आरंभ हुआ – बैंकॉक

• वह शिक्षण संस्थान जहां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हाल ही में Alumni Endowment Fund लॉन्च किया है – आईआईटी दिल्ली

• सीपीआई के पूर्व सांसद और दिग्गज वामपंथी नेता जिनका हाल ही में निधन हो गया है – गुरुदास दासगुप्ता

• चिली द्वारा COP25 सम्मेलन का आयोजन रद्द करने के बाद वह देश जिसने इसका आयोजन करने की घोषणा की है – स्पेन

• एरिट्रिया और सेंट किट्स एंड नेविस नामक दो देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने पर गठबंधन में शामिल कुल देशों की संख्या है – 83

• वह एजुकेशनल इंस्टिट्यूट जिसने हाल ही में पहली बार इंडियन ब्रेन एटलस तैयार की है – आईआईटी हैदराबाद

• जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 समाप्त करने के बाद रेडियो कश्मीर का नाम बदलकर रखा गया है – ऑल इंडिया रेडियो कश्मीर

• इन्हें हाल ही में 28वां व्यास सम्मान प्रदान किया गया – लीलाधर जगूरी

• वह राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पुलिस जिसके मुख्यालय का उद्घाटन गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सरदार वल्लबभाई पटेल की जयंती के अवसर पर किया गया – दिल्ली पुलिस

✅ करेंट अफेयर्स एक पंक्ति में: 04 नवंबर 2019 

• हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जिस राज्य के राज्यपाल के तौर पर शपथ ली- गोवा

• आयकर विभाग ने जमशेदजी टाटा ट्रस्ट, आर.डी.टाटा ट्रस्ट समेत जितने टाटा ट्रस्टों का पंजीकरण रद्द कर दिया है-6

• जिस राज्य में 24 घंटे से अधिक रुकने के लिए बाहरी लोगों को राज्य सरकार के पास अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा- मेघालय

• वह देश जिसने इतिहास में पहली बार टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में भारत को मात दी है- बांग्लादेश 

• भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में प्रमोटर हिस्सेदारी कम करके 40 प्रतिशत पर नहीं लाने के कारण जिस बैंक पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है- बंधन बैंक

• भारत और उज्बेकिस्तान के रक्षा मंत्रियों के बीच एक बैठक के बाद दोनों देशों ने सुरक्षा संबंधों में सहयोग को लेकर जितने समझौतों पर हस्ताक्षर किए- तीन

• हाल ही में जिस देश की सरकार ने सभी सातों प्रदेश के राज्यपालों को बर्खास्त कर दिया है- नेपाल

• हाल ही में महिला और बाल विकास मंत्रालय ने यूनिसेफ द्वारा चलाई गई जिस पहल को लॉन्च किया है- युवाह पहल

• प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जिस देश के प्रधानमंत्री प्रयुत चान ओचा रक्षा उद्योग क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने की संभावनाएं तलाशने पर सहमत हुए- थाईलैंड


• भारतीय टीम के कार्यवाहक कप्तान रोहित शर्मा जिस पूर्व कप्तान को पछाड़कर भारत के लिए सबसे ज़्यादा टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गये हैं- एम.एस. धोनी

Friday, 27 December 2019

राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाएं


►1904 ➖ भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित
►1905 ➖ बंगाल का विभाजन
►1906 ➖ मुस्लिम लीग की स्थापना
►1907 ➖ सूरत अधिवेशन, कांग्रेस में फूट
►1909 ➖ मार्ले-मिंटो सुधार
►1911 ➖ ब्रिटिश सम्राट का दिल्ली दरबार
►1916 ➖ होमरूल लीग का निर्माण
►1916 ➖ मुस्लिम लीग-कांग्रेस समझौता (लखनऊ पैक्ट)
►1917 ➖ महात्मा गाँधी द्वारा चंपारण में आंदोलन
►1919 ➖ रौलेट अधिनियम
►1919 ➖ जलियाँवाला बाग हत्याकांड
►1919 ➖ मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार
►1920 ➖ खिलाफत आंदोलन
►1920 ➖ असहयोग आंदोलन
►1922 ➖ चौरी-चौरा कांड
►1927 ➖ साइमन कमीशन की नियुक्ति
►1928 ➖ साइमन कमीशन का भारत आगमन
►1929 ➖ भगतसिंह द्वारा केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट
►1929 ➖ कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वतंत्रता की माँग

►1930 ➖ सविनय अवज्ञा आंदोलन
►1930 ➖ प्रथम गोलमेज सम्मेलन
►1931 ➖ द्वितीय गोलमेज सम्मेलन
►1932 ➖ तृतीय गोलमेज सम्मेलन
►1932 ➖ सांप्रदायिक निर्वाचक प्रणाली की घोषणा
►1932 ➖ पूना पैक्ट
►1942 ➖ भारत छोड़ो आंदोलन
►1942 ➖ क्रिप्स मिशन का आगमन
►1943 ➖ आजाद हिन्द फौज की स्थापना
►1946 ➖ कैबिनेट मिशन का आगमन
►1946 ➖ भारतीय संविधान सभा का निर्वाचन
►1946 ➖ अंतरिम सरकार की स्थापना
►1947 ➖ भारत के विभाजन की माउंटबेटन योजना
►1947 ➖ भारतीय स्वतंत्रता प्राप्ति

कुछ महान कार्यों से सम्बंधित व्यक्त🎓
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1. ब्रह्मा समाज – राजाराममोहन राय
2. आर्य समाज – स्वामी दयानंद सरस्वती
3. प्रार्थना समाज – आत्माराम पांडुरंग
4. दीन-ए-इलाही, मनसबदारी प्रथा – अकबर
5. भक्ति आंदोलन – रामानुज
6. सिख धर्म – गुरु नानक
7. बौद्ध धर्म – गौतमबुद्ध
8. जैन धर्म – महावीर स्वामी
9. इस्लाम धर्म की स्थापना, हिजरी सम्वत – हजरत मोहम्मद साहब
10. पारसी धर्म के प्रवर्तक – जर्थुष्ट
11. शक सम्वत – कनिष्क
12. मौर्य वंश का संस्थापक – चन्द्रगुप्त मौर्य
13. न्याय दर्शन – गौतम
14. वैशेषिक दर्शन – महर्षि कणाद
15. सांख्य दर्शन – महर्षि कपिल
16. योग दर्शन – महर्षि पतंजली
17. मीमांसा दर्शन – महर्षि जैमिनी
18. रामकृष्ण मिशन – स्वामी विवेकानंद
19. गुप्त वंश का संस्थापक – श्रीगुप्त
20. खालसा पन्थ – गुरु गोविन्द सिंह
21. मुगल साम्राज्य की स्थापना – बाबर
22. विजयनगर साम्राज्य की स्थापना – हरिहर व बुक्का
23. दिल्ली सल्तनत की स्थापना – कुतुबुद्दीन ऐबक
24. सतीप्रथा का अंत – लॉर्ड विलियम बेंटिक
25. आंदोलन : असहयोग,सविनय अवज्ञा, खेडा, चम्पारन, नमक, भारत छोडो – महात्मा गाँधी
26. हरिजन संघ की स्थापना – महात्मा गाँधी
27. आजाद हिंद फ़ौज की स्थापना – रास बिहारी बोस
28. भूदान आंदोलन – आचार्य विनोबा भावे
29. रेड क्रॉस – हेनरी ड्यूनेंट
30. स्वराज पार्टी की स्थापना – पंडित मोतीलाल नेहरु
31. गदर पार्टी की स्थापना – लाला हरदयाल
32. ‘वन्देमातरम्’ के रचियता – बंकिमचन्द्र चटर्जी
33. स्वर्ण मंदिर का निर्माण – गुरु अर्जुन देव

34. बारदोली आंदोलन – वल्लभभाई पटेल
35. पाकिस्तान की स्थापना – मो० अली जिन्ना
36. इंडियन एसोशिएशन की स्थापना – सुरेन्द नाथ बनर्जी
37. ओरुविले आश्रम की स्थापना- अरविन्द घोष
38. रुसी क्रांति के जनक – लेनिन
39. जामा मस्जिद का निर्माण – शाहजहाँ
40. विश्व भारती की स्थापना – रवीन्द्रनाथ टैगोर
41. दास प्रथा का उन्मूलन – अब्राहम लिंकन
42. चिपको आंदोलन – सुंदर लाल बहुगुणा

43. बैकों का राष्ट्रीकरण – इंदिरा गाँधी
44. ऑल इण्डिया वीमेन्स कांफ्रेंस की स्थापना – श्रीमती कमला देवी
45. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना – एम०एन० राय
46. नेशनल कांफ्रेंस की स्थापना – शेख अब्दूल्ला
47. संस्कृत व्याकरण के जनक – पाणिनी
48. सिख राज्य की स्थापना – महाराजा रणजीत सिंह
49. भारत की खोज – वास्कोडिगामा

#gk 
शक्ति का मात्रक है– वाट
बल का मात्रक है– न्यूटन
कार्य का मात्रक है– जूल
चालक की वैधुत प्रतिरोधकता की मात्रक है– ओम मीटर
प्रकाश वर्ष इकाई है– दूरी का
प्रकाश वर्ष है– वह दूरी, जो प्रकाश 1 वर्ष में तय करता है|
एक पारसेक, तारों संबंधी दूरियां मापने का मात्रक, बराबर है– 3.25 प्रकाश वर्ष
पारसेक मात्रक है– दूरी की
एंपियर मापने की इकाई है– current
मेगा वाट बिजली के नापने की इकाई है जो– उत्पादित की जाती है
त्वरण का मात्रक है– मीटर प्रति सेकंड स्क्वायर
आवेश का मात्रक है– न्यूटन सेकंड
उष्मा का मात्रक है – कैलोरी
समुद्री जहाज की गति मापी जाती है– नॉट
नौसंचालन का मात्रक है– नॉटिकल मील
विभवांतर का मात्रक है– वोल्ट
प्रकाश के तरंगधैर्य का मात्रक है – Angastram
एक हॉर्स पावर में कितने वाट होते हैं-746
ऊर्जा का मात्रक है– जूल
दाब का मात्रक है– पास्कल
उच्च वेग को प्रदर्शित करता है– मैक(mach)
ध्वनि की प्रबलता की मात्रक है– डेसीबल
शक्ति की इकाई है– अश्वशक्ति(हॉर्स पॉवर)
नौसंचालन में दूरी की इकाई है– समुद्री मील
क्यूसेक में मापा जाता है – जल का बहाव
ओजोन परत की ऊंचाई मापी जाती है– dabson(डॉबसन)
महासागर में डूबी हुई वस्तुओं की स्थिति जानने के लिए यंत्र का प्रयोग करते हैं– सोनार
नौसंचालाको द्वारा प्रयोग में लाया जाता है– सोनार
ध्वनि की तीव्रता मापने वाले यंत्र हैं– ऑडियो मीटर
वायु की चाल मापने वाला यंत्र है– एनीमोमीटर
विधुत प्रतिरोध का मात्रक है– ओम
विधुत आवेश का मात्रक है  -कूलाम
करेंट का मात्रक है– एम्पिएर
लम्बाई की न्यूनतम इकाई है– फर्मिमीटर
भूकम्प की तीव्रता मापी जाती है– रिक्टर पैमाने पर
डॉबसन इकाई का प्रयोग  जाता है – ओजोन परत की मोटाई मापने में
ध्वनि की तीव्रता को मापने वाला यन्त्र है– ऑडियोमीटर
पईरोमीटर मापन में प्रयोग होता है– उच्च ताप
मैनोमीटर के द्वारा माप की जाती है – गैसों के दाब
दाब मापने हेतु प्रयोग की जाती है – बैरोमीटर
अमीटर प्रयोग की जाती है – करंट
हाइग्रोमीटर मापन में प्रयोग होता है – आर्द्रता
रक्त दब मापने के यन्त्र है – स्फिग्मोमैनोमीटर
प्रकाश की तीव्रता मापने के लिए प्रयोग की जाती है – लक्समीटर
सिस्मोग्राफ क्या रिकॉर्ड करता है– भूचाल
रेनगेज का प्रयोग होता है – वर्षामापी के लिए
मात्रकों का अंतरराष्ट्रीय पद्धति कब लागू हुआ– 1971
एस आई पद्धति में लेंस की शक्ति का मात्रक है– डायोप्टर
ल्यूमेन मात्रक है- ज्योति फ्लक्स का
कैंडेला मात्रक है– ज्योति तीव्रता का
रेडियोऐक्टिव धर्मिता का मात्रक है- क्यूरी

✅ करेंट अफेयर्स एक पंक्ति में: 03 नवंबर 2019 

• भारत का वह शहर जिसे यूनेस्को की UCCN सूची में पाक-कला श्रेणी में शामिल किया गया है – हैदराबाद

• वह देश जिसने हाल ही में अधिकारिक रूप से 5G नेटवर्क लॉन्च किया है – चीन

• चुनाव आयोग द्वारा झारखंड विधानसभा चुनावों को इतने चरणों में कराये जाने की घोषणा की गई है – पांच

• जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच किये गये समझौतों की संख्या – 17

• भारत का वह शहर जहां प्रदूषण के चलते स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया है – दिल्ली

• भारतीय खिलाड़ी शिवा थापा और पूजा रानी द्वारा ओलिंपिक टेस्ट में जीते गये पदक – स्वर्ण पदक

• वह दिन जब हरियाणा स्थापना दिवस मनाया जाता है – 01 नवंबर

• वह टेक्नोलॉजी कंपनी जिसने Fitbit का अधिग्रहण कर लिया है – गूगल

• भारत और उजबेकिस्तान के मध्य नवंबर 2019 में आयोजित होने वाले संयुक्त सैन्य-अभ्यास का नाम है – Dustilk-2019

• भारत का पड़ोसी देश जहां ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर’ के मामले सामने आये हैं – चीन

यह भी पढ़ें: करेंट अफेयर्स एक पंक्ति में: 02 नवंबर 2019

🔰हिंदी साहित्य वस्तुनिष्ठ🔰

◼कहानी "तीसरी कसम" जिस पर फिल्म बन चुकी है किसने लिखी है ?
➤➤☑फणीश्वर नाथ रेणु

◼हिंदू मग पर पांव न राख्यों; का बहुतै जो हिंदी भाख्यौ।"पंक्ति है?
➤➤☑नूर मुहम्मद

◼रीतिकालीन कवियों को 
1.रीतिबद्ध 2.रीतिसिद्ध 3.रीतिमुक्त कवियों की श्रेणियों में किस विद्वान ने विभाजित किया था ?
➤➤☑डा.विश्वनाथ प्रसाद मिश्र

◼किस विद्वान ने आदिकाल को 'जयकाव्यकाल' कहकर पुकारा है ? 
➤➤☑डा.रामशंकर शुक्ल 'रसाल

◼"मै जग जीवन का भार लिए फिरता हूँ ,
फिर मे जीवन मे प्यार लिए फिरता हूँ ।"
पंक्तियो मे प्रधान अलंकार है -?
➤➤☑विरोधाभास अलंकार

◼जायसी कृत चित्ररेखा नामक ग्रंथ का नायक हैं?
➤➤☑राजकुमार प्रीतम

◼इनमें से रीतिकाल का आदर्श काल है ? 
➤➤☑1650 ई.से1850ई

◼विद्यापति ने अपभ्रंश को कहा?
➤➤☑देशी वाणी

◼बच्चन जी पर फारसी के किस कवि का प्रभाव-?
➤➤☑उमर खय्याम

◼विद्यापति के पदों में प्रधान रस है?
➤➤☑श्रंगार

◼सचेतन कहानी का प्रवर्तन कब व किसने किया?
 ➤➤☑1964,महीप सिंह

◼जायसी के पद्मावत काव्य को माना जाता है?
➤➤☑समसोक्ति**

◼सूफी शब्द की व्युत्पत्ति मे किस शब्द को अधिकाधिक मान्यता मिली?
➤➤☑सूफ

◼रामकुमार वर्मा ने जायसी के गुरु बताया है
➤➤☑सैयद मोहिद्दिन
मुला दाउद

◼प्रेमचंद के कहानी संग्रह है
➤➤☑मानसरोवर 8 भाग व गुप्तधन 2भाग

◼जायसी का किस राजघराने मे बहुत मान था?
➤➤☑अमेठी

◼भा अवतार मोर नौ सदी तीस बरस ऊपर कवि बदी!"यह पंक्ति किस कवि ने अपने जन्म के बारे मे कही है?
➤➤☑जायसी

◼उस समय मे हाट बाजार मे जाना छोड़ घर मे पडे़ पडे़ मृगावती और मधुमालती नाम कि पोथियाँ पढा करता था यह कथन किसका है?
➤➤☑बनारसीदास जैन

◼जादुई यथार्थवाद शब्द का सबसे पहले प्रयोग किसने किया ?
➤➤☑गार्सिया माक्रवेज

◼सूफी परम्परा मे कितने हिन्दू कवि हुए है
➤➤☑1 ~सूरदास पंजाबी

◼पद्मावत के सभी पात्र किस रूप में है?
➤➤☑प्रतीक

◼दसवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ?
➤➤☑स्थान :भोपाल ,भारत
10-12 सितम्बर 2015 
उद्घाटन द्वारा :नरेंद्र मोदी ,प्रधान मंत्री, 
प्रतिभागी देश:27
प्रतिनिधियों की संख्या :2000

◼पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित  हुआ?
 ➤➤☑स्थान :नागपुर ,भारत 10-12 जनवरी 1975उद्घाटन द्वारा : इंदिरा गांधी ,प्रधान मंत्री ,भारत प्रतिभागी देश :30प्रतिनिधियों की संख्या :122

◼दूसरा विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित  हुआ?
➤➤☑स्थान :पोर्ट लुइस ,मारीसस,28-30 अगस्त 1976 प्रतिभागी देश :17 प्रतिनिधियों की संख्या :181

◼11 वाँ विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित होगा?
➤➤☑मॉरीशस18-20 अगस्त 2018 तक 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा

◼हिंदी भाषा के ' हिंदी' शब्द का प्राचीनतम प्रयोग मिलता है?
➤➤☑जफरनामा

◼हिंदी भाषा है?
➤➤☑वियोगात्मक

 ◼'गुल की बन्नो' कहानीकार है - 
➤➤☑धर्मवीर भारती

◼इनमें से किस लेखक ने नाटकों में अभिनय करने के लिए अपने पिताजी से मूँछ मुडवा लेने की आज्ञा मांगी थी
➤➤☑प्रतापनारायण मिश्र

 ◼मगही किस उपभाषा की बोली है ? 
➤➤☑ बिहारी

◼आत्मपरिचय' रचना किस काव्य संग्रह से ली गई है -
➤➤☑ निशा निमंत्रण

◼आदिकालीन जैन,सिद्ध व नाथ साहित्य को ''साम्प्रदायिक शिक्षा मात्र'' की संज्ञा किसने दी है ? 
➤➤☑आचार्य शुक्ल

◼बच्चन जी इलाहाबाद विश्वविधालय मे किस विषय के प्राध्यापक थे -
➤➤☑अग्रेजी

◼पथ के साथी" किस विधा की रचना है?
➤➤☑रेखा चित्र

 ◼ग्यारहवें रस के रूप में भक्ति रस को प्रतिष्ठित करने वाले आचार्य हैं -
➤➤☑रूपगोस्वामी

◼बांधो, बांधो किरणे चेतन 
तेजस्वी, हे तमाज्जीवन आती भारत की ज्योतिनिर्धन महिमा बल!"पंक्तिया निराला की किस कविता से है?
➤➤☑तुलसीदास

◼पुहुपावती किसकी रचना है जिसका सम्पादन डॉ परमेश्वरी लाल गुप्त ने किया?
➤➤☑संत दुखहरन

◼निज भाषा बोलहु लिखहु
पढ़ हु लिखहु सब लोग"किस की पंक्ति है?
➤➤☑श्री धर पाठक

◼नयी कविता पत्रिका का प्रकाशन कहाँ से होता था?
➤➤☑प्रयाग

◼महादेवी जी के काव्य में हमे छायावाद का शुद्ध रूप मिलता है। कथन है?
➤➤☑विनयमोहन शर्मा

◼ग्रियर्सन विद्यापति को मानते हैं
➤➤☑श्रंगारी कवि

◼प्रसिद्ध कविता आत्महत्या के विरुद्ध किसकी है?
➤➤☑रघुवीर सहाय

◼राजा शिवसिह की पत्नी का नाम था?
➤➤☑लक्ष्मणा देवी

◼श्यामा स्वप्न' के लेखक कौन है?
➤➤☑ठाकुर जगन्मोहन सिंह

◼मेरी तेरी उसकी बात' के लेखक कौन हैं?
 ➤➤☑यशपाल 

◼भाषा और समाज' के लेखक कौन हैं?
➤➤☑रामविलास शर्मा 

◼उत्तर संरचनावाद' के मुख्य विचारक हैं?
➤➤☑सास्यूर 

◼अर्धकथानक' किस भाषा की रचना है?
➤➤☑ब्रज 

◼हिंदी भाषा की पहली आत्मकथा अर्धकथानक' सन् 1641 ई.  के लेखक है ?
 ➤➤☑'बनारसी दास जैन' 

◼नागफनी "जूठन "मुर्दहिया किस विधा की रचना है?
➤➤☑दलित आत्मकथा

🔰 विश्व इतिहास के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी 

● सौ चूहों की अपेक्षा एक शेर का शासन उत्तम है’ यह किसने कहा था
— वॉल्टेयर का 
● ‘कानून की आत्मा’ की रचना किसने की
— मॉटेस्क्यू
● माप-तौल की दशमलव प्रणाली का शुभारंभ कहाँ से हुआ
— फ्रांस से
● सांस्कृतिक राष्ट्रीयता का जनक किसे कहा जाता है
— हर्डर को
● नेपोलियन फ्रांस का राजा कब बना
— 1804 ई.
● नेपोलियन के पिता का नाम क्या था
— कार्लो बोनापार्ट
● आधुनिक फ्रांस का जनक किसे कहा जाता है
— चार्ल्स डे गॉल
● इंग्लैंड को ‘बनियो का देश’ किसने कहा था
— नेपोलियन ने
● ‘राइट्स ऑफ मैन’ के लेखक कौन हैं
— टॉमस पेन
● ‘मदर’ की रचना किसने की
— मैक्सिको गोकी
● ‘गुलाबों का युद्ध’ कब हुआ
— 21 अक्टूबर, 1805 ई.
● मैग्नाकार्टा की घोषणा कब हुई
— 1215 ई.
● फ्रांस में राष्ट्रीय दिवस कब मनाया जाता है
— 14 जुलाई को
● लुई सोलहवाँ को किस अपराध में फाँसी दी गई
— दोशद्रोह के अपराध में
● स्टेट्स जनरल के अधिवेशन का शुभारम्भ कब हुआ
— 5 मई, 1789 में
● बैंक ऑफ फ्रांस की स्थापना किसने की
— नेपोलियन ने
● नेपोलियन के पतन का कारण क्या था
— रूस पर आक्रमण करना
● लिटल कॉरपोरल किसे कहा जाता है
— नेपोलियन को
● जर्मनी का सबसे शक्तिशाली राज्य कौन- सा था
— प्रशा
● बिस्मार्क को सबसे अधिक भय किससे था
— फ्रांस से
● बिस्मार्क को किसने बाजीगगर कहा था
— विलियम प्रथम ने
● हिटलर का जन्म कब व कहाँ हुआ था
— 20 अप्रैल, 1889 ई., ब्राउनाउ में
● नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी का गठन कब व किसने किया
— 1920 ई., हिटलर ने
● नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी को अन्य किस नाम से जाना जाता था
— नाजी पार्टी
● हिटलर की आत्मकथा का नाम क्या है
— मेरा संघर्ष (माई स्ट्रगल)
● जर्मन सुरक्षा परिषद की स्थापना कब हुई
— 4 अप्रैल, 1933 ई.
● ‘एक राष्ट्र, एक नेता’ यह नारा किसने दिया 
— हिटलर ने
● हिटलर की विस्तारवादी नीति का शिकार सर्वप्रथम कौन-सा राष्ट्र हुआ
— ऑस्ट्रिया
● हिटलर ने आत्महत्या कब की
— 30 अप्रैल, 1945 ई.
● जर्मनी में आर्थिक राष्ट्रवाद का पिता किसे माना जाता है
— फ्रेडरिक लिस्ट को
● सात सप्ताह का युद्ध अथवा ऑस्ट्रिया- पर्शिया युद्ध कब हुआ
— 1866 में



Sunday, 22 December 2019

पेटा PETA

 पेटा (PETA ) या पशुओं के साथ नैतिक व्यवहार के पक्षधर लोग (People for the Ethical Treatment of Animals) एक पशु-अधिकार संगठन है। इसका मुख्यालय यूएसए के वर्जिनिया के नॉर्फोल्क (Norfolk) में स्थित है। विश्व भर में इसके लगभग २० लाख सदस्य हैं और यह अपने को विश्व का सबसे बड़ा पशु-अधिकार संगठन होने का दावा करता है। PETA का गठन 1980 में इनग्रिड न्यूकिर्क एवं एलेक्स पचेको द्वारा किया गया था।  इन्ग्रिड न्यूकिर्क (Ingrid Newkirk) इसके अन्तरराष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

PETA or People for the Ethical Treatment of Animals is an animal rights organization. It is headquartered in Norfolk, Virginia, USA. It has about two million members worldwide and claims to be the largest animal rights organization in the world. PETA was formed in 1980 by Ingrid Newkirk and Alex Pacheco. Ingrid Newkirk is its international president.

PETA उन चार क्षेत्रों पर अपना ध्यान केन्द्रित करती है जिसमें सर्वाधिक जानवरों को, लम्बे समय तक, सर्वाधिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है। इन चार क्षेत्रों में खाद्य उद्योग, कपड़ा व्यापार, प्रयोगशालाएँ एवं मनोरंजन उद्योग सम्मिलित है। इसके अलावा PETA कई अन्य मुद्दों पर भी कार्य करता है जिसमें पक्षी, कृतंक अर्थात कुतरने वाले जानवर जैसे चुहा, गिलहरी आदि एवं पशुओं की कर हत्या शामिल है। तब भी जानवरों पर अत्याचार के मामले सामने आते है PETA के के लोग बढ़ चढ़कर बचाव कार्यों में हिस्सा लेते है। पीईटीए सार्वजनिक शिक्षा, क्रूरता जांच, अनुसंधान, पशु बचाव, कानुन, विशेष कार्यक्रमों एवं विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से कार्य करती है। दुनिया की बहुत समस्याओं में एक महत्वपूर्ण मुद्दा है पशुओं का शोषण जिसके उपाय के लिए कार्य करने वाली प्रमुख संस्था है PETA (People for the Ethical Treatment of Animals) है। PETA ने अपने प्रारम्भिक वर्षों में ही अमेरिका सेना दवारा फायरिंग रेंज में कुत्तों को शूट करने की योजना को उजागर किया और बंद करवाया। इसके अलावा कई बूचड़खानों को बंद करवा लगभग 30000 घोड़ों को आजाद कराया।PETA ने 26000 से अधिक पशुओं को विदेशी पशु विक्रेता से बचाया। इसके अलावा कैन्सस में नीलसन फार्म में जानवरों पर होने वाले अत्याचार का विरोध कर उसे बद करवाया।

PETA focuses on four areas in which most animals suffer the most, over a long period of time. These four sectors include food industry, textile trade, laboratories and entertainment industry. Apart from this, PETA also works on a number of other issues including taxing of birds, animals such as munching animals such as mice, squirrels, etc. Even then there are cases of atrocities on animals. PETA's people take part in rescue operations. PETA works through public education, cruelty investigations, research, animal rescue, law enforcement, special programs and protests. One important issue in many problems of the world is the exploitation of animals for which the main institution working for its remedy is PETA (People for the Ethical Treatment of Animals). PETA uncovered and closed down plans to shoot dogs at the firing range by the US Army in its early years. In addition, the closure of many slaughterhouses freed around 30,000 horses. PETA rescued more than 26000 animals from foreign cattle sellers. In addition, Nielsen Farm in Kansas protested against the atrocities on animals and got them replaced.
पेटा इंडिया (PETA INDIA)
पेटा इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर सचिन बंगेरा है। इण्डिया में पेटा का मुख्यालय मुम्बई में स्थित है। जिसे जनवरी 2000 में शुरू किया गया था। इनका कार्य सभी को शिक्षित करना है कि जानवर हमारे प्रयोग करने, खाने, पहनने, मनोरंजन के लिए उपयोग करने, या किसी अन्य तरीके से दुरुपयोग करने के लिए नहीं हैं साथ ही जानवरों के साथ दुर्व्यवहार करने और सभी जानवरों के सम्मान की समझ को बढ़ावा देना भी है।

The Associate Director of PETA India is Sachin Bangera. PETA headquarters in India is located in Mumbai. Which was launched in January 2000. Their task is to educate everyone that animals are not for us to use, eat, wear, use for recreation, or in any other way, as well as to promote an understanding of animals being abused and respect for all animals We have to give.

पेटा इंडिया मुख्य रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है जिनमें सबसे अधिक संख्या में पशु खाद्य उद्योग में, चमड़े के व्यापार में और मनोरंजन व्यवसाय में प्रयोगशालाओं में सबसे अधिक पीड़ित हैं। पेटा इंडिया की जांच, सार्वजनिक शिक्षा के प्रयासों, अनुसंधान, जानवरों के बचाव, विधायी कार्य, विशेष कार्यक्रम, सेलिब्रिटी की भागीदारी, और राष्ट्रीय मीडिया कवरेज ने जानवरों के लिए जीवन की गुणवत्ता में अनगिनत सुधार किए हैं और अनगिनत जानवरों को बचाया है।


PETA India mainly focuses on those sectors with the highest number of victims in the animal feed industry, in the leather trade and in the entertainment business. The PETA India investigation, public education efforts, research, animal rescue, legislative work, special events, celebrity involvement, and national media coverage have led to countless improvements in the quality of life for animals and rescued countless animals.

Sunday, 25 August 2019

हिंदू कोड बिल (HINDU CODE BILL)

हिन्दू कोड बिल और आंबेडकर

बाबा साहेब आंबेडकर एक काबिल वकील थे, उन्हें कानून बनाने की प्रक्रिया के बारे में कोई गलतफहमी नहीं थी। स्वतंत्र भारत के कानून मंत्री के रूप में उन्होंने “हिंदू कोड बिल” पर महीनों काम किया। उनका मानना था कि जाति व्यवस्था में महिलाओं को दबा कर रखा जाता है, और इसलिए उनकी सबसे बड़ी चिंता यही थी कि हिंदू कोड बिल को ऐसा बनाया जाए जिसमें महिलाओं को बराबर का अधिकार हो। उन्होंने अपने बिल में महिलाओं को तलाक देने के प्रस्ताव के अलावा विधवा और बेटी को संपत्ति में अधिकार देने का प्रस्ताव रखा था। संविधान सभा ने इसमें अंड़गा डाल दिया (1947 से 1951 तक) और बाद में तो इसे रोक ही दिया गया।

Baba Saheb Ambedkar was a capable lawyer, he had no misconceptions about the law making process. As the Law Minister of independent India, he worked for months on the "Hindu Code Bill". He believed that women are kept under control in the caste system, and therefore his biggest concern was to make the Hindu Code Bill in which women have equal rights.In his bill, he proposed to give rights in property to widows and daughters, besides proposing to divorce women. The Constituent Assembly put an egg in it (from 1947 to 1951) and it was later stopped.

राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने धमकी दी कि वह इस बिल को कानून नहीं बनने देगें। हिंदू साधुओं ने संसद पर धरना दे दिया। उद्योगपतियों और जमींदारों ने धमकी दी कि वे अगले चुनाव में सरकार से समर्थन वापस ले लेगें। परिणामस्वरूप आंबेडकर ने कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। और हिंदुओं ने “हिन्दू कोड बिल” को नहीं पास होने दिया। बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का भारत के विकास में जितना योगदान रहा है, उतना शायद ही किसी और राजनेता का रहा हो। एक अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, शिक्षाविद् और कानून के जानकार के तौर पर अंबेडकर ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी और देश उनके इस योगदान को लेकर आज भी जागरूक नहीं है।


President Rajendra Prasad threatened that he would not allow this bill to become law. Hindu monks sit on the Parliament. Industrialists and landlords threatened that they would withdraw support from the government in the next election. As a result, Ambedkar resigned from the post of Law Minister. And the Hindus did not allow the "Hindu Code Bill" to pass.The contribution of Babasaheb Dr. Bhimrao Ambedkar to the development of India has hardly been that of any other politician. As an economist, sociologist, educationist and law scholar, Ambedkar had laid the foundation of modern India and the country is still not aware of his contribution.

- डॉ. अंबेडकर संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। उन पर आधुनिक भारत का संविधान बनाने की जिम्मेदारी थी और उन्होंने एक ऐसे संविधान की रचना की जिसकी नजरों में सभी नागरिक एक समान हों, धर्मनिरपेक्ष हो और जिस पर देश के सभी नागरिक विश्वास करें। एक तरह से भीमराव अंबेडकर ने आजाद भारत  की रचना की थी। इसके अलावा डॉक्टर अंबेडकर की प्रेरणा से ही भारत के वित्त आयोग की स्थापना हुई थी। डॉ. अंबेडकर के विचार  से ही भारत के केन्द्रीय बैंक की स्थापना हुई जिसे आज हम भारतीय रिजर्व बैंक  के नाम से जानते हैं। दामोदर घाटी परियोजनाए हीराकुंड परियोजना और सोन नदी परियोजना को स्थापित करने में डॉ. अंबेडकर ने बड़ी भूमिका निभाई थी। भारत में  रोजगार का आदान-प्रदान की स्थापना भी डॉक्टर अंबेडकर के विचारों की वजह से हुई थी। भारत में पानी और बिजली के ग्रिड प्रणाली की स्थापना में भी डॉक्टर अंबेडकर का अहम योगदान माना जाता है।  भारत को एक स्वतंत्र चुनाव आयोग भी डॉ. भीमराव अंबेडकर की ही देन है। ये वो योगदान है जिन्हें आजादी के बाद की तमाम सरकारों ने हमेशा ही अनदेखा किया है। यानी योजनाएं और विचार अंबेडकर के थे, लेकिन उनका श्रेय दूसरे लोगों ने लूटा। डॉ. अंबेडकर, जवाहर लाल नेहरू की सरकार में प्लानिंग का मंत्रालय चाहते थे लेकिन नेहरू ने अंबेडकर को सिर्फ कानून मंत्रालय दिया। डॉ. अंबेडकर विदेश और रक्षा मामलों की समितियों में सदस्यता चाहते थे, लेकिन नेहरू सरकार ने डॉ. अंबेडकर को ऐसी किसी समिति का सदस्य नहीं बनाया। डॉ. अंबेडकर हिंदुओं में सामाजिक अधिकार और महिलाओं को संपत्ति का अधिकार देने की बात करने वाले हिंदू कोड को समाज सुधार के लिए जरूरी मानते थे लेकिन नेहरू सरकार ने अंबेडकर के मंत्री रहते हुए हिंदू कोड को स्वीकार नहीं किया।

Dr. Ambedkar was the chairman of the drafting committee of the constitution. He had the responsibility of making the constitution of modern India and he designed a constitution in which all citizens should be equal in the eyes, be secular and on which all citizens of the country should trust. In a way, Bhimrao Ambedkar created independent India. Apart from this, the Finance Commission of India was established with the inspiration of Dr. Ambedkar. It was at the thought of Dr. Ambedkar that the Central Bank of India was established, which we now know as the Reserve Bank of India.Dr. Ambedkar played a big role in setting up Damodar Valley Projects, Hirakud Project and Son River Project. The exchange of employment in India was also established due to Dr. Ambedkar's ideas. Dr. Ambedkar is also considered an important contributor to the establishment of water and electricity grid system in India. India also owes an independent Election Commission to Dr. Bhimrao Ambedkar. This is a contribution that has been ignored by all governments since independence. That is, Ambedkar's plans and ideas were credited by others. Dr. Ambedkar wanted a ministry of planning in Jawaharlal Nehru's government, but Nehru gave Ambedkar only the Law Ministry. Dr. Ambedkar wanted membership in the Committees on Foreign and Defense Affairs, but the Nehru Government did not make Dr. Ambedkar a member of any such committee. Dr. Ambedkar, who talked about social rights among Hindus and the right of property to women, considered the Hindu code to be necessary for social reform, but the Nehru government, while being a minister of Ambedkar, did not accept the Hindu code.

डॉ. अंबेडकर को उनकी मौत के 34 वर्षों के बाद 1990 में वीपी सिंह सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया । बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़ी तमाम सच्चाइयां है। इन सच्चाइयों को जानना और समझना आधुनिक भारत के निर्माण के लिए बहुत जरूरी हैं। डॉ. अंबेडकर को जातियों की सीमा में बांधना और उन्हें सिर्फ दलितों के मसीहा के तौर पर पेश किया जाना उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय होगा ।
अंबेडकर ने तो अपने स्कूल जीवन में ही तिरस्कार सहा था। स्कूल में बाकी दलित बच्चों की ही तरह अंबेडकर को भी बाकी सवर्ण बच्चों से अलग बिठाया जाता था। अंबेडकर के संस्कृत शिक्षक ने उन्हें संस्कृत पढ़ाने से ही इनकार कर दिया था। बाकी के शिक्षक अंबेडकर की किताबों को हाथ भी नहीं लगाते थे। अंबेडकर के साथ ये भेदभाव और तिरस्कार सिर्फ स्कूल जीवन तक ही सीमित नहीं रहा। उनका जीवन ऐसे तिरस्कार की घटनाओं से भरा हुआ है ।  निचली जाति से होने की वजह से अंबेडकर का शोषण हर स्तर पर होता रहा। अंबेडकर जब विदेश से पढ़कर हिंदुस्तान लौटे तो बड़ौदा के महाराजा ने उन्हें अपना सचिव बना दिया। बेशक अंबेडकर का पद बड़ा था लेकिन उनकी नौकरी के दौरान भी कोई उनकी इज्जत नहीं करता था। चपरासी अंबेडकर के हाथ में फाइल पकड़ाने के बजाए फेंक दिया करते थे। उन्हें पीने के लिए पानी नहीं दिया जाता था। मुंबई में अंबेडकर को उनके निचली जाति का होने की वजह से एक पारसी धर्मशाला से बाहर फेंक दिया गया था। उस दौर में अंग्रेजों से लड़ने के लिए पूरा देश खड़ा था तो दलित और शोषित लोगों के अधिकारों के लिए अकेले भीमराव अंबेडकर समाज के उच्च वर्ग और कांग्रेस से संघर्ष कर रहे थे। डॉ अंबेडकर का मानना था देश की तरक्की के लिए देश के हर वर्ग को समानता का अधिकार मिलना जरूरी है। बचपन में हुए भेदभावों की वजह से अंबेडकर हिंदू धर्म को छोड़ना चाहते थे।  डॉ. अंबेडकर का मानना था कि हिंदू धर्म को छोड़ना धर्म परिवर्तन नहीं बल्कि गुलामी की जंजीरें तोड़ने जैसा है। डॉ. अंबेडकर की इस घोषणा के बाद हैदराबाद के निजाम समेत कई मुस्लिम संगठनों ने अंबेडकर को धर्म परिवर्तन के ऑफर दिए, लेकिन बाबा साहब ने हर ऑफर को ठुकरा दिया क्योंकि वो अपने समाज के लोगों को इज्जत से जीने वाला धर्म देना चाहते थे इसीलिए वो हिंदू धर्म को छोड़कर 1956 में बौद्ध धर्म की शरण में चले गए। 

Dr. Ambedkar was awarded the Bharat Ratna by VP Singh Sarkar in 1990, after 34 years of his death. Baba Saheb has all the truths associated with Dr. Bhimrao Ambedkar. Knowing and understanding these truths are very important for the creation of modern India. It would be a great injustice to tie Dr. Ambedkar to the limits of castes and to project him as the messiah of only Dalits.Ambedkar had suffered reproach in his school life. Like the rest of the Dalit children in school, Ambedkar too was segregated from the other upper caste children. Ambedkar's Sanskrit teacher refused to teach him Sanskrit. The rest of the teachers did not even touch Ambedkar's books. This discrimination and disdain with Ambedkar was not limited to school life alone. His life is filled with incidents of such contempt.Being from a lower caste, Ambedkar was exploited at all levels. When Ambedkar returned to India after studying from abroad, the Maharaja of Baroda made him his secretary. Of course, Ambedkar's post was big, but nobody respected him even during his job. Peons used to throw Ambedkar in his hand instead of holding the file.They were not given water to drink. In Mumbai, Ambedkar was thrown out of a Parsi Dharamshala because of his lower caste. At that time, the whole country stood to fight the British, then Bhimrao Ambedkar was fighting for the rights of the downtrodden and the exploited people against the upper class of the society and the Congress.
Dr. Ambedkar believed that every class of the country should get the right to equality for the country's progress. Ambedkar wanted to leave Hinduism because of the childhood discrimination. Dr. Ambedkar believed that abandoning Hinduism was not a change of religion but breaking the chains of slavery.

After this announcement by Dr. Ambedkar, many Muslim organizations, including the Nizam of Hyderabad, offered to convert Ambedkar, but Baba Saheb turned down every offer because he wanted to give the people of his society a religion that lived with dignity, that's why Leaving Hinduism, he moved to Buddhism in 1956.

        15 अगस्त 1947 को आजादी का जश्न डॉ बाबा साहेब अंबेडकर के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी लेकर आया। देश की नई सरकार को देश का संविधान बनाने के लिए एक काबिल व्यक्ति की तलाश थी जिसे कानून की जानकारी के अलावा देश और दुनिया की समझ और समाज की जरूरतों बारे में पूरी जानकारी हो और ये तलाश डॉ. अंबेडकर पर ख़त्म हुई। डॉ भीमराव अंबेडकर को देश का पहला कानून मंत्री बनाया गया जिन्होंने अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद महज 2 साल के अंदर देश को एक मजबूत संविधान दिया। अंबेडकर ने 1951 में हिंदू कोड बिल तैयार कर संसद में पेश किया जिसमें महिलाओं को भी समान अधिकार की बात कही गयी। हिंदू कोड बिल के तहत पिता की संपत्ति में बेटी को समान अधिकार, विवाहित पुरूष को एक से अधिक पत्नी रखने पर प्रतिबंध, महिलाओं को भी तलाक का अधिकार शामिल था, लेकिन रूढ़िवादी हिंदू ताकतों और सरकार के अंदर ही बिल का विरोध करने वालों के सामने हिंदू कोड बिल लागू नहीं हो सका और सरकार में अपना प्रभाव घटने से निराश होकर डॉ. अंबेडकर ने 1951 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में डॉ अंबेडकर ने लिखा--
        "आज हिंदू कोड बिल की हत्या कर दी गयी। ऐसे में मेरा मंत्री बने रहने का अर्थ समझ में नहीं आता। बिल में शादी और तलाक संबंधी विधेयक पर दो दिन की चर्चा चली फिर प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पूरे हिंदू कोड बिल को वापिस लेने की घोषणा कर दी, मैं हैरान रह गया। मैं ये मानने को तैयार नहीं हूं कि तलाक और विवाह संबंधी बिल को समय की कमी के चलते पास नहीं करवाया जा सकता, मुझे प्रधानमंत्री की नीयत पर शक नहीं है लेकिन हिंदू कोड बिल पास कराने के लिए जिस संकल्प और ईमानदारी की जरूरत थी वो उनमें नहीं दिखी।"
       अपने इस्तीफे के बाद डॉ. भीमराव अंबेडकर ने ख़ुद राजनैतिक जिम्मेदारी से भले ही अलग कर लिया था लेकिन सामाजिक जिम्मेदारी को वो अपने अंतिम समय तक निभाते रहे। डॉ. भीमराव अंबेडकर को हम तक सिर्फ दलितों के मसीहा और संविधान निर्माता के तौर पर पेश किया गया है लेकिन उनकी भूमिका एक राष्ट्रनेता की रही जो चाहते थे देश का हर वर्ग आजादी की खुली हवा में सम्मान की सांसें ले सके। बाबा साहेब आंबेडकर विश्वमानव थे।

The celebration of independence on 15 August 1947 brought a big responsibility for Dr. Baba Saheb Ambedkar. The new government of the country was looking for a capable person to make the constitution of the country, who, apart from the knowledge of the law, has complete knowledge about the understanding of the country and the world and the needs of the society, and this search ended on Dr. Ambedkar.Dr. Bhimrao Ambedkar was made the first law minister of the country who, despite his deteriorating health, gave the country a strong constitution within just 2 years. In 1951, Ambedkar prepared the Hindu Code Bill and introduced it in Parliament, in which women were also talked about equal rights.Under the Hindu Code bill, father's property included equal rights to daughter, ban on married man having more than one wife, women also had the right to divorce, but in front of conservative Hindu forces and those opposing the bill within the government itself The Hindu Code Bill could not be implemented and Dr. Ambedkar resigned from the post of minister in 1951, disappointed with his influence in the government.In his resignation, Dr. Ambedkar wrote-

        "Today the Hindu code bill was assassinated. I do not understand the meaning of being a minister in such a situation. The bill lasted two days on the marriage and divorce bill. Then Prime Minister Jawaharlal Nehru withdrew the entire Hindu code bill. Announced, I was shocked. I am not ready to believe that divorce and marriage bill cannot be passed due to lack of time,I do not doubt the Prime Minister's intentions but the resolve and honesty that was required to pass the Hindu Code Bill was not seen in him. "

        After his resignation, Dr. Bhimrao Ambedkar may have separated himself from political responsibility, but he continued to fulfill social responsibility till his last time. Dr. Bhimrao Ambedkar has been introduced to us only as the messiah of Dalits and the creator of the Constitution, but his role was that of a national leader who wanted every section of the country to breathe in the open air of freedom. Baba Saheb Ambedkar was a world man.

हिन्दू कोड बिल भारत में स्वतन्त्रता के पश्चात पारित कई अधिनियमों का समूह है। इसके अन्तर्गत निम्नलिखित अधिनियम आते हैं-

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, १९५६, हिन्दू विवाह अधिनियम, हिन्दू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम (Hindu Minority and Guardianship Act), हिन्दू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम (Hindu Adoptions and Maintenance Act)

हिन्दू कोङ बिल की कुछ मुख्य नीयम निम्नलिखित है

1. माँ ही परिवार की मुख्य भूमिका निभाती है क्योकि माँ पूरा दिन परिवार मे रहती हैं और पुरा कार्य करती हैं]]

2. बच्चौ की प्रारंभीक शीक्षा घर पर हि माता पिता द्वारा हो सके

3. बच्चौ को प्रारंभीक शीक्षा के बाद गुरुकुल भेज दिया जाय

2. बच्चौ की प्रारंभीक शीक्षा घर पर हि माता पिता द्वारा हो सके
3. बच्चौ को प्रारंभीक शीक्षा के बाद गुरुकुल भेज दिया जाय|

The Hindu Code Bill is a set of several Acts passed after independence in India. The following Acts come under this-

Hindu succession act, 1956, Hindu Marriage Act, Hindu Minority and Guardianship Act, Hindu Adoptions and Maintenance Act.

Following are some of the main rules of the Hindu Code Bill

1. The mother plays the main role of the family as the mother stays in the family all day and does all the work.]

2. Initial initiation of children can be done at home by parents

3. Children should be sent to Gurukul after initial initiation

जब भारत आजाद हुआ तब हिंदू समाज में पुरुष और महिलाओं को तलाक का अधिकार नहीं था. पुरूषों को एक से ज्यादा शादी करने की आजादी थी लेकिन विधवाएं दोबारा शादी नहीं कर सकती थी. विधवाओं को संपत्ति से भी वंचित रखा गया था।  आजादी के बाद भारत का संविधान बनाने में जुटी संविधान सभा के सामने 11 अप्रैल 1947 को डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने हिंदू कोड बिल पेश किया था. इस बिल में बिना वसीयत किए मृत्यु को प्राप्त हो जाने वाले हिंदू पुरुषों और महिलाओंं की संपत्ति के बंटवारे के संबंध में कानूनों को संहिताबद्ध किए जाने का प्रस्ताव था। यह विधेयक मृतक की विधवा, पुत्री और पुत्र को उसकी संपत्ति में बराबर का अधिकार देता था. इसके अतिरिक्त, पुत्रियों को उनके पिता की संपत्ति में अपने भाईयों से आधा हिस्सा प्राप्त होता। इस विधेयक में विवाह संबंधी प्रावधानों में बदलाव किया गया था. यह दो प्रकार के विवाहों को मान्यता देता था-सांस्कारिक व सिविल. इसमें हिंदू पुरूषों द्वारा एक से अधिक महिलाओं से शादी करने पर प्रतिबंध और अलगाव संबंधी प्रावधान भी थे. यह कहा जा सकता है कि हिंदू महिलाओं को तलाक का अधिकार दिया जा रहा था। विवाह विच्छेद के लिए सात आधारों का प्रावधान था. परित्याग, धर्मांतरण, रखैल रखना या रखैल बनना, असाध्य मानसिक रोग, असाध्य व संक्रामक कुष्ठ रोग, संक्रामक यौन रोग व क्रूरता जैसे आधार पर कोई भी व्यक्ति तलाक ले सकता था। यह बिल ऐसी तमाम कुरीतियों को हिंदू धर्म से दूर कर रहा था जिन्हें परंपरा के नाम पर कुछ कट्टरपंथी जिंदा रखना चाहते थे। इसलिए इसका जोरदार विरोध हुआ । इसलिए आंबेडकर के तमाम तर्क और नेहरू का समर्थन भी बेअसर साबित हुआ. इस बिल 9 अप्रैल 1948 को सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया। बाद में 1951 को आंबेडकर ने हिंदू कोड बिल को संसद में पेश किया. इसे लेकर संसद के अंदर और बाहर विद्रोह मच गया. सनातनी धर्मावलम्बी से लेकर आर्य समाजी तक आंबेडकर के विरोधी हो गए। उस समय भारत का संविधान भी बनकर तैयार था. लेकिन संसद के सदस्यों को जनता ने नहीं चुना था. इन सदस्यों को बहुसंख्यक हिंदू समाज में बदलाव और पुराने रीति-रिवाजों को बदलने का निर्णय करना था. संसद में तीन दिन तक बहस चली। हिंदू कोड बिल का विरोध करने वालों का कहना था कि संसद के सदस्य जनता के चुने हुए नहीं है इसलिए इतने बड़े विधेयक को पास करने का नैतिक अधिकार नहीं है. एक और विरोध इस बात का था कि सिर्फ हिंदुओं के लिए कानून क्यों लाया जा रहा है, बहुविवाह की परंपरा तो दूसरे धर्मों में भी है. इस कानून को सभी पर लागू किया जाना चाहिए. यानी समान नागरिक आचार संहिता संसद में जहां जनसंघ समेत कांग्रेस का हिंदूवादी धड़ा इसका विरोध कर रहा था तो वहीं संसद के बाहर हरिहरानन्द सरस्वती उर्फ करपात्री महाराज के नेतृत्व में बड़ा प्रदर्शन चल रहा था। अखिल भारतीय राम राज्य परिषद की स्थापना करने वाले करपात्री का कहना था कि यह बिल हिंदू धर्म में हस्तक्षेप है. यह बिल हिंदू रीति-रिवाजों, परंपराओं और धर्मशास्त्रों के विरुद्ध है. उन्होंने इस बिल पर प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को वाद-विवाद करने की खुली चुनौती दी। देश के पहले लोकसभा चुनाव के बाद नेहरू ने हिंदू कोड बिल को कई हिस्सों में तोड़ दिया. जिसके बाद 1955 में हिंदू मैरिज एक्ट बनाया गया. जिसके तहत तलाक को कानूनी दर्जा, अलग-अलग जातियों के स्त्री-पुरूष को एक-दूसरे से विवाह का अधिकार और एक बार में एक से ज्यादा शादी को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया । इसके अलावा 1956 में ही हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, हिंदू दत्तक ग्रहण और पोषण अधिनियम और हिंदू अवयस्कता और संरक्षकता अधिनियम लागू हुए। ये सभी कानून महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा देने के लिए लाए गये थे. इसके तहत पहली बार महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिया गया. लड़कियों को गोद लेने पर जोर दिया गया। आज भी कुछ सवर्ण जाति के लोग ऊंची सोच को ऊंची जाति से जोड़ देते हैं। अगर सवर्ण महिलाएं भी इस नैरेटिव में विश्वास रखती हैं, तो वे इतिहास के साथ अन्याय कर रही हैं। वे यह भूल रही हैं कि जब ऊंची जाति के मर्द महिलाओं को पीछे छोड़कर मर्दवादी समाज को आगे ले जाना चाहते थे, तब एक दलित खुद लेटकर उनके और उनके अधिकारों के बीच पुल बन गया था।

When India became independent, men and women did not have the right to divorce in Hindu society. Men had the freedom to marry more than one but widows could not marry again. Widows were also denied property. After independence, the Hindu Code Bill was introduced by Dr. Bhimrao Ambedkar on 11 April 1947 in front of the Constituent Assembly which was making the Constitution of India. The bill proposed to codify laws regarding the sharing of property of Hindu men and women who died without a will.The Bill gave equal rights to the deceased's widow, daughter and son in his property. Additionally, daughters would receive half of their father's property from their brothers. The provisions related to marriage were changed in this bill. It recognized two types of marriages -Cultural and civil. There were also provisions related to the prohibition of Hindu men marrying more than one woman, and segregation. It can be said that Hindu women were being given the right to divorce. There was a provision of seven grounds for the separation of marriage. Any person could get divorced on grounds of abandonment, conversion, keeping or becoming a mistress, incurable mental disease, incurable and infectious leprosy, infectious sexual disease and cruelty.The bill was removing all such evils from Hinduism, which some fundamentalists wanted to keep alive in the name of tradition. Therefore, it was strongly opposed. Therefore, all the arguments of Ambedkar and the support of Nehru proved ineffective. The bill was sent to the Select Committee on 9 April 1948. 
Later on 1951, Ambedkar introduced the Hindu Code Bill in Parliament. A rebellion took place inside and outside Parliament. Sanatani went against Ambedkar from Dharmavalambi to Arya Samaji. The Constitution of India was also ready at that time. But the members of Parliament were not elected by the public. These members had to decide to change the majority Hindu society and change the old customs. The debate lasted for three days in Parliament.
Those opposing the Hindu Code Bill had said that the members of Parliament are not elected by the people, therefore there is no moral right to pass such a big bill. Another protest was that why laws are being brought only for Hindus, the tradition of polygamy is also in other religions. This law should be applied to all. This means that while the Hinduist faction of the Congress, including the Jana Sangh, was opposing it in the Uniform Civil Code of Conduct, there was a big protest outside the Parliament under the leadership of Hariharanand Saraswati alias Karpatri Maharaj. 
Karpatri, who founded the All India Ram Rajya Parishad, said that this bill is an intervention in Hinduism. This bill is against Hindu customs, traditions and theology. He openly challenged Prime Minister Jawaharlal Nehru to debate this bill. After the country's first Lok Sabha elections, Nehru broke the Hindu Code Bill in several parts. After which the Hindu Marriage Act was enacted in 1955. Under this, the legal status of divorce, the right of men and women of different castes to marry each other and more than one marriage at a time was declared illegal. Also in 1956, Hindu Succession Act, Hindu Adoption and Nutrition Act and Hindu Minority and Guardianship Act came into force. All these laws were brought to give women equal status in society. Under this, women were given property rights for the first time. The emphasis was on adopting girls. 

Even today some upper caste people associate high thinking with upper caste. If the upper caste women also believe in this narrative, then they are doing injustice to history. She is forgetting that when the upper caste men wanted to leave the women behind and take forward the masculine society, then a Dalit lying down became a bridge between them and their rights.

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